November 2, 2026 7:00 pm

सोनभद्र में अनपरा में कोयला संकट, 1200 मेगावाट की मेघा परियोजना क्रिटिकल जोन में

। रिपोर्टर विजेन्द्र कुमार मौर्या राबर्ट्सगंज सोनभद्र PNP news।

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सोनभद्र। अनपरा क्षेत्र स्थित मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (एमईआईएल) की अनपरा एनर्जी लिमिटेड इन दिनों कोयले की भारी कमी से जूझ रही है। 1,200 मेगावाट क्षमता वाली इस तापीय परियोजना में मानक के अनुरूप महज 15 फीसदी कोयले का ही स्टाक बचा है, जिससे परियोजना ‘क्रिटिकल जोन’ में पहुंच गई है।परियोजना में 600-600 मेगावाट की दो इकाइयों से बिजली उत्पादन किया जा रहा है। वर्तमान में प्लांट लोड फैक्टर (पीएलएफ) 82 फीसदी बना हुआ है, जो उत्पादन की बेहतर स्थिति को दर्शाता है। हालांकि कोयले के सीमित भंडारण ने प्रबंधन की चिंता बढ़ा दी है।

 

नियमों के अनुसार, परियोजना में 17 दिनों के संचालन के लिए करीब 2.65 लाख टन कोयले का स्टाक होना चाहिए, लेकिन वर्तमान में महज 40 हजार टन कोयला ही उपलब्ध है। यह निर्धारित मानक का लगभग 15 प्रतिशत ही है। किसी भी तापीय परियोजना में जब कोयले का स्टाक 25 फीसदी से नीचे पहुंच जाता है, तो उसे क्रिटिकल जोन में माना जाता है।

 

दोनों इकाइयों के पूर्ण क्षमता से संचालन की स्थिति में प्रतिदिन करीब 17 हजार टन से अधिक कोयले की खपत हो रही है। इस लिहाज से मौजूदा स्टाक सिर्फ तीन दिन के संचालन के लिए ही पर्याप्त है।हालांकि एनसीएल की खदानों से प्रतिदिन 15 से 20 हजार टन कोयले की आपूर्ति मिल रही है, जिससे फिलहाल उत्पादन निर्बाध रूप से जारी है। परियोजना प्रबंधन का कहना है कि सभी पहलुओं पर सतर्कता के साथ काम किया जा रहा है, ताकि बिजली उत्पादन प्रभावित न हो। बावजूद इसके, कोयले के सीमित भंडारण को लेकर स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

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