कलेक्टर रोक्तिमा यादव के सख्त निर्देश पर प्रशासनिक अमले का औचक निरीक्षण, हड़कंप
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!• करिया डॉक्टर और बाकची क्लिनिक पर ताला, सिंह क्लिनिक की गड़बड़ियों पर कारण बताओ नोटिस
• शासकीय चिकित्सक की संदिग्ध भूमिका भी रडार पर, बीएमओ और ड्रग इंस्पेक्टर ने दी चेतावनी
सरगुजा संभाग हेड ध्रुव जायसवाल
बचरा-पोंडी जिला कोरिया में मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वाले अवैध स्वास्थ्य संस्थानों और झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ प्रशासन ने अब तक का सबसे बड़ा और कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। कलेक्टर श्रीमती रोक्तिमा यादव के स्पष्ट निर्देशों और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. प्रशांत सिंह के सीधे मार्गदर्शन में स्वास्थ्य महकमे व प्रशासनिक टीम ने बचरा-पोंडी क्षेत्र में धुआंधार औचक निरीक्षण कर अवैध डॉक्टरी के काले कारोबार की धज्जियाँ उड़ा दीं।
बुधवार, 09 सितंबर को हुई इस ताबड़तोड़ कार्रवाई से पूरे क्षेत्र के अवैध क्लिनिक संचालकों में अफरा-तफरी का माहौल निर्मित हो गया है। निरीक्षण के दौरान नियमों को दरकिनार कर बेधड़क संचालित हो रहे दो क्लिनिकों को मौके पर ही सील कर दिया गया, वहीं एक नामी क्लिनिक की भारी अनियमितताओं पर कारण बताओ नोटिस थमाने की तैयारी कर ली गई है।
बिना रजिस्ट्रेशन चल रहा था डॉक्टरी का धंधा: करिया डॉक्टर और बाकची क्लिनिक सील
संयुक्त निरीक्षण दल ने जब बचरा-पोंडी के ‘करिया डॉक्टर क्लिनिक’ और ‘बाकची क्लिनिक’ पर दबिश दी, तो चौंकाने वाले खुलासे हुए। दोनों ही संस्थान बिना किसी वैध पंजीयन और बिना वैधानिक अनुज्ञा के धड़ल्ले से मरीजों का इलाज कर रहे थे। ‘छत्तीसगढ़ राज्य उपचर्यागृह तथा रोगोपचार संबंधी स्थापना (पंजीकरण एवं अनुज्ञापन) अधिनियम’ (नर्सिंग होम एक्ट) के नियमों की खुलेआम धज्जियाँ उड़ाई जा रही थीं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच दल ने बिना कोई ढील दिए दोनों क्लिनिकों का संचालन तत्काल प्रभाव से बंद कराते हुए उन्हें सील कर दिया। इसके साथ ही दोनों संचालकों के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसते हुए अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
कागजों में कुछ, जमीन पर कुछ! ‘सिंह क्लिनिक’ की आड़ में बड़ा खेल
कार्रवाई की जद में ‘सिंह क्लिनिक एंड डायग्नोस्टिक सेंटर’ भी आया। जांच में पाया गया कि इस संस्थान के पास नर्सिंग होम एक्ट का पंजीयन तो है, लेकिन जितनी क्षमता और श्रेणी की अनुमति मिली है, उससे कहीं अधिक व्यापक और अनधिकृत स्तर पर क्लिनिकल व डायग्नोस्टिक सेवाएं दी जा रही थीं।
सरकारी डॉक्टर की भूमिका संदिग्ध:
जांच के दौरान सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब यह बात सामने आई कि जिस डॉक्टर के नाम पर यह क्लिनिक पंजीकृत है, वे स्वयं शासकीय सेवा (सरकारी नौकरी) में कार्यरत हैं। सरकारी पद पर रहते हुए इस तरह के निजी खेल की स्थिति संदिग्ध पाई गई है। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सिंह क्लिनिक एंड डायग्नोस्टिक सेंटर को कारण बताओ (Show Cause) नोटिस जारी किया जा रहा है।
प्रशासनिक व पुलिस अमले की संयुक्त टीम रही मौजूद
अवैध क्लीनिकों पर इस बड़े प्रहार के लिए गठित संयुक्त टीम में प्रमुख रूप से शामिल रहे:
डॉ. अनित बखला (खंड चिकित्सा अधिकारी)
श्री सिराज अहमद (नायब तहसीलदार)
श्री आलोक मिंज एवं श्री विकास लकड़ा (औषधि निरीक्षक)
श्री प्रदीप सूर्यवंशी (प्रभारी, नर्सिंग होम एक्ट शाखा)
पुलिस चौकी बचरा-पोंडी का सशक्त आरक्षक बल
जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं, कार्रवाई लगातार जारी रहेगी: बीएमओ
कार्रवाई के दौरान खंड चिकित्सा अधिकारी (BMO) डॉ. अनित बखला ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा:
“अवैध रूप से क्लिनिक चलाना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि यह सीधे तौर पर आम जनता के स्वास्थ्य और जीवन से खिलवाड़ है। नर्सिंग होम एक्ट के तय मानकों का पालन न करने वाले किसी भी संस्थान को बख्शा नहीं जाएगा। हमारी टीम लगातार क्षेत्र में औचक निरीक्षण करेगी और ऐसे सभी अवैध क्लिनिकों पर सख्त वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”
औषधि निरीक्षक का सख्त रुख
जांच दल में शामिल औषधि निरीक्षक श्री आलोक मिंज ने कहा:
“अवैध रूप से दवाइयों का भंडारण और बिना मानक लाइसेंस के क्लिनिकों का संचालन गंभीर मामला है। निरीक्षण में पाई गई कमियों के आधार पर सीलिंग की कार्रवाई की गई है। दवाओं के वितरण और प्रैक्टिस के मानकों में लापरवाही पर ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट एवं नर्सिंग होम एक्ट के तहत आगे भी कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।”
बिना दबाव होगी कठोरतम कार्रवाई, आगे भी जारी रहेगा अभियान: CMHO
इस कड़े कदम पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रशांत सिंह ने कड़ा संदेश देते हुए कहा:
“कोरिया जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर आम जनता की सेहत से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बिना वैध पंजीयन के संचालित अस्पताल, क्लिनिक या नर्सिंग होम पर सीधी और कठोर कानूनी कार्रवाई होगी। जो लोग पंजीयन की आड़ में स्वीकृत क्षमता से अधिक या फर्जी तरीके से सेवाएं दे रहे हैं, वे भी बख्शे नहीं जाएंगे। यह अभियान निरंतर जारी रहेगा और बिना किसी राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव के निष्पक्ष कार्रवाई की जाएगी।”











