। रिपोर्टर विजेन्द्र कुमार मौर्या राबर्ट्सगंज सोनभद्र PNP news।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!एनटीपीसी लिमिटेड प्रदेश में पांच वर्ष के दौरान लगभग पांच हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन बढ़ाएगा। कोयले के साथ ही सौर व परमाणु ऊर्जा से बिजली उत्पादन की प्रस्तावित परियोजनाओं को स्थापित करने के लिए एनटीपीसी को राज्य सरकार से जमीन व पानी की दरकार है।जमीन-पानी सहित अन्य स्वीकृतियां मिलने पर एनटीपीसी राज्य में बिजली उत्पादन की परमाणु परियोजना लगाने पर भी काम शुरू करेगा।
एनटीपीसी लिमिटेड के क्षेत्रीय कार्यकारी निदेशक (उत्तर) दिवाकर कौशिक ने सोमवार को मीडिया से संवाद के दौरान बताया कि एनटीपीसी प्रदेश में बिजली उत्पादन की अपनी क्षमता का विस्तार कर रहा है। लगभग ढाई वर्ष में प्रदेश को सिंगरौली स्टेज-III से 1600 मेगावाट बिजली उपलब्ध होगी।
उन्होंने बताया कि एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड द्वारा प्रदेश में एक हजार मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता विकसित की जा रही है। इसमें से 600 मेगावाट ललितपुर में और 400 मेगावाट सौर ऊर्जा का प्लांट चित्रकूट में स्थापित किया जा रहा है।
कौशिक ने बताया कि मेजा थर्मल पावर प्रोजेक्ट का विस्तार करते हुए 800-800 मेगावाट की तीन यूनिटें उप्र राज्य विद्युत उत्पादन निगम के साथ मिलकर स्थापित करने की दिशा में भी काम चल रहा है। इस तरह से राज्य को 2400 मेगावाट बिजली लगभग पांच वर्ष में और मिलने लगेगी।प्रदेश में परमाणु ऊर्जा से बिजली बनाने की परियोजना स्थापित करने के संबंध में कौशिक ने बताया चूंकि परमाणु ऊर्जा से बिजली उत्पादन की परियोजना लगाने के लिए 16 किलोमीटर के दायरे में आबादी नहीं होनी चाहिए इसलिए झांसी-ललितपुर, प्रयागराज और सोनभद्र में जमीन और पानी की उपलब्धता के आधार पर संभावनाएं देखी गईं हैं।
जमीन-पानी व अन्य पर राज्य सरकार की मंजूरी मिलने के बाद इस दिशा में काम किया जाएगा। कार्यकारी निदेश ने बताया कि एनटीपीसी ग्रुप के कुल बिजली उत्पादन में उत्तरी क्षेत्र की परियोजनाओं की 72.4 पीएलएफ (प्लांट लोड फैक्टर) के साथ 25 प्रतिशत से अधिक (1,10,992 मिलियन यूनिट) की हिस्सेदारी है।
उन्होंने बताया कि स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में एनटीपीसी द्वारा ग्रेटर नोएडा में हाइड्रोजन फ्यूलिंग स्टेशन, विंध्याचल में कार्बन कैप्चर, वाराणसी में हरित कोयला परियोजना का विकास शामिल है।
दादरी में बायोमास का उपयोग भी किया जा रहा है। सल्फर उत्सर्जन को कम करने के लिए परियोजनाओं में फ्लू गैस डी-सल्फराइजेशन (एफजीडी) सिस्टम कोलगाया जा रहा है।उन्होंने बताया कि सीएसआर (कारपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व) के तहत वन्यजीव संरक्षण के लिए चिड़ियाघरों में पशु गोद लेने एवं बुनियादी सुविधाओं का विकास भी किया जा रहा है।











