November 2, 2026 8:06 pm

मेरी पहचान – एक भारतीय सैनिक’ पुस्तक का लोकार्पण

 

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रेवाड़ी, 29 सितंबर चीफ ब्यूरो दीपक तिवारी

 

13 कुमाऊँ रेजिमेंट के गौरवशाली इतिहास और वीरता के प्रतीक ज़लूरा दिवस पर गाँव कनीना में एक शहीद स्‍मारक स्‍थल पर भव्य समारोह का आयोजन किया गया। यह दिन उन शहीदों की स्मृति को समर्पित है, जिन्होंने 26 सितम्बर 1994 को आतंकवादियों से मुकाबले में सर्वोच्च बलिदान दिया। इस वीरता भरे अभियान में सुबेदार सज्जन सिंह (अशोक चक्र) सहित नौ सैनिकों ने शहादत दी थी, जबकि दो को शौर्य चक्र और दो को सेना पदक से अलंकृत किया गया।

कार्यक्रम में 13 कुमाऊँ के सेवारत सैनिकों, रेजांगला बटालियन के पूर्व सैनिकों, आईटीबीपी जवानों, वीर नारियों तथा शहीदों के परिजनों ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित कर आयोजन को गरिमा प्रदान की।

मुख्य अतिथि के रूप में मेजर जनरल अरविंद यादव, अतिरिक्त महानिदेशक आर्टिलरी ने शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता कौशल्या देवी, अशोक चक्र विजेता सुबेदार सज्जन सिंह की वीर नारी ने की। जबकि रिम्पी यादव, अध्यक्ष, कनीना मार्केट कमेटी, विशिष्ट अतिथि रहीं।

इस अवसर पर उत्तर प्रदेश से आए 50 से अधिक पूर्व सैनिकों और कैप्टन विश्वनाथ सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे। पुष्पांजलि अर्पित करने वालों में मुख्य अतिथि के अलावा मेजर (डॉ.) टी.सी. राव (वयोवृद्ध), कर्नल टोनी चेरीयन, कर्नल छिब्बर (13 कुमाऊँ), कर्नल गोपाल सिंह (अध्यक्ष, ABPSSP), विंग कमांडर सतीश यादव (सचिव, सैनिक बोर्ड महेन्द्रगढ़), राव अजीत सिंह (क्रूसेडर, अहिर रेजिमेंट), कर्नल ओ.पी. यादव (13 कुमाऊँ), राज सिंह (डीआईजी), लोढ़ा, कैप्टन बलबीर सिंह, कैप्टन चन्दन सिंह, कैप्टन राजेन्द्र सिंह, सूबेदार मेजर धरमदेव आदि शामिल रहे। समारोह का संचालन कौशिक प्राचार्य ने किया। कार्यक्रम की विशेष उपलब्धि के रूप में मेजर (डॉ.) टी.सी. राव द्वारा लिखित पुस्तक “मेरी पहचान – एक भारतीय सैनिक” का लोकार्पण मेजर जनरल अरविंद यादव और अन्य विशिष्ट अतिथियों द्वारा वीर नारियों तथा पूर्व सैनिकों की उपस्थिति में किया गया। यह पुस्तक लेखक के 24 वर्षों के सैन्य जीवन की प्रेरणादायक कहानी है, जिसमें वे 18 वर्ष की आयु में केवल ₹35 लेकर घर से निकले, रानीखेत पहुंचकर प्रसिद्ध कुमाऊँ रेजिमेंट में भर्ती हुए। रेजांगला युद्ध से प्रेरित होकर अधिकारी बने और सेवानिवृत्ति के पश्चात एक अरब डॉलर मूल्य वाली सफल व्यावसायिक कंपनी की स्थापना की।ज़लूरा दिवस पर यह आयोजन शौर्य, समर्पण और देशभक्ति की उस भावना को नमन है, जिसने भारतीय सेना को विश्व की सबसे अनुशासित और वीर सेनाओं में स्थान दिलाया है।

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