मनोज कुमार जहानाबाद
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!खरीफ फसल के लिए अनुकूल मौनसून का साथ मिला तथा किसानों के मेहनत और पूंजी के रूप में जो निवेश किया उसका सार्थक परिणाम दृष्टिगोचर होने लगा लेकिन अकस्मात फाल्स स्मट नामक बीमारी ने किसानों के हौसले को पस्त कर दिया। देखते देखते धान की बालियों पर काले काले धब्बे नजर आने लगा। तथा आकार में वृद्धि होने से बालियों की क्षति तेजी से हो रही है।काफी तेजी से इसका संक्रमण बढ़ते हुए पुरे खेत ही नहीं बल्कि बधार को जद में ले लिया।यह बीमारी से शायद ही कोई गांव वंचित हैं।
इसे देहाती भाषा में लक्षमिनिया या हरदिया भी कहा जाता है । तथा जैसा कि बताया गया कि ज्यादातर इसका प्रकोप महीन प्रभेद के धान में अधिक देखा जा रहा है। हालांकि अन्य प्रभेदो के धान वंचित नहीं है।खेत में जाने पर शरीर एवं कपड़ा पीले रंग से सराबोर हो जाता है।धान काटने वाले मजदूरों को सांस लेना मुश्किल हो जा रहा है जिससे धान कट भी नहीं पा रहा है।सबसे अहम समस्या है कि धान की गुणवत्ता एवं उपज दोनों प्रभावित हो रहा है। परेशान किसान दवा का छिड़काव तो कर रहे हैं लेकिन कोई लाभ नहीं मिल रहा है।इस संबंध में प्रखंड कृषि पदाधिकारी बिरेंद्र सिंह ने बताया कि फाल्स स्मट फुफूंदजनित बीमारी है तथा धान की फसल में बाली निकलते समय जब वातावरण में अधिक आर्द्रता होने के साथ ही बादल भी छाए रहते हैं, तब फाल्स स्मट रोग का प्रकोप शुरू होता है। इस रोग के बिजाणु मृदा में ही रहते हैं। इसलिए कृषि वैज्ञानिक बीज शोधन के साथ मृदा शोधन पर भी जोर देते हैं। इससे प्रभावित दानों पर पीले रंग का पाउडर दिखाई देने लगता है। जिसे छूने पर वह हाथ पर लग जाता है। यह रोग फसल में लगने के बाद फफूंदी नाशक का छिड़काव भी काम नहीं करता। उन्होंने बताया कि जिस बाली में यह रोग लगता है, उसके दाने न सिर्फ खराब हो जाते हैं बल्कि वजन भी कम हो हो जाता है। इस रोग से अधिक प्रभावित पौधों की बालियों को सावधानी पूर्वक काट कर खेत से बाहर निकालकर जला देना चाहिए। फसल में यूरिया का प्रयोग संतुलित मात्रा में प्रयोग करना चाहिए।
रोग पर नियंत्रण के लिए कॉपर ऑक्सीक्लोराइड की दो ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी में घोलकर खेत में 50 प्रतिशत बालियां आने के बाद छिड़काव करना फायदेमंद रहता है। इसके अलावा क्लोरथनोनिल 75 प्रतिशत डब्लूपी की दो ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी में मिलाकर प्रभावित फसल पर छिड़काव करना मुफीद रहता है।











