रेवाड़ी, 24 जून चीफ ब्यूरो दीपक तिवारी
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डीसी अभिषेक मीणा ने 28 जून से 30 जून तक पल्स पोलियो अभियान के सफल क्रियान्वयन को लेकर बुधवार को लघु सचिवालय सभागार में बैठक की। डीसी अभिषेक मीणा ने बताया कि पल्स पोलियो अभियान के अंतर्गत 28 जून को बुथ एक्टिविटी के तहत तथा 29 व 30 जून को घर-घर पोलियो ड्रॉप पिलाई जाएगी। इस अभियान के अंतर्गत जिला में 682 बूथों पर 0 से 5 वर्ष तक के लगभग 94 हजार 285 बच्चों को पोलियो रोधी दवा पिलाई जाएगी। इसके अतिरिक्त अति संवेदनशील एरिया जैसे झुग्गी झोपड़ी, भट्ट, निर्माणाधीन भवनों इत्यादि पर बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने के लिए 38 मोबाइल टीम लगाई गई है तथा बस स्टैंड व रेलवे स्टेशन आदि स्थानों पर भी पोलियो रोधी दवा पिलाने के टीमें लगाई गई है। डीसी ने बैठक में स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ संबंधित विभागों के अधिकारियों को आपसी समन्वय स्थापित करते हुए अभियान को सफल बनाएं। सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर भी पोलियो रोधी दवाई पिलानी सुनिश्चित की जाए। जिला में 0 से 5 वर्ष तक के सभी बच्चों को पोलियो रोधी दवा पिलाई जाए।
इसके साथ-साथ डीसी अभिषेक मीणा ने 31 जुलाई तक चलाए जा रहे डायरिया रोको अभियान और एचपीवी वैक्सीनेशन अभियान की समीक्षा करते हुए जिला टास्क फोर्स कमेटी को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. भंवर सिंह ने बताया कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देशानुसार जिला में चलाए जाने वाले पल्स पोलियो अभियान को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने पूरी तैयारी कर ली है। पहले दिन बूथ पर पोलियो की दवाई पिलाई जाएगी। दूसरे व तीसरे दिन टीमें घर घर जाकर छूट गए बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाई जाएगी। उन्होंने बताया कि डायरिया से होने वाले शिशु मृत्यु की रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए जिला में डायरिया रोको अभियान भी 16 जून से शुरू किया जा चुका है जोकि 31 जुलाई तक चलाया जा रहा है। इस अभियान के दौरान आशा वर्कर तथा एएनएम द्वारा 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों को घर-घर जाकर ओआरएस पैकेट वितरित करते हुए अभिभावकों को ओ.आर.एस. तथा जिंक के प्रयोग के बारे में जानकारी दी जा रही है, ताकि डायरिया होने की स्थिति में तुरंत ओ.आर.एस. पैकेट प्रयोग हो सके तथा जिन बच्चों में डायरिया के लक्षण पाए जाएं उन्हे जिंक उपलब्ध करवाया जाएगा। इसके अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्रों, उप स्वास्थ्य केंद्रों समुचित व्यवस्था की गई है। डीसी ने जिला में चलाए जा रहे एचपीवी वैक्सीनेशन अभियान की भी समीक्षा करते हुए अभियान में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करते हुए 14 से 15 साल की आयु की किशोरियों एचपीवी वैक्सीनेशन के बारे में जानकारी दें तथा उनके अभिभावकों को भी जानकारी दें कि एचपीवी वैक्सीनेशन अभियान मुख्य रूप से 14 से 15 आयु की किशोरियों के लिए मुख्य रूप से चलाया जा रहा है। यह वैक्सीन एचपीवी के टाइप-16 व 18 से सुरक्षा प्रदान करती है जो सर्वाइकल कैंसर के प्रमुख कारण माने जाते हैं। इसके साथ यह टाइप-6 और टाइप-11 से भी बचाव करती है।
इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास कार्यक्रम अधिकारी शालू यादव, जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डा. बसंत सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।











