November 2, 2026 6:01 pm

जहानाबाद समाचार:सरकार की महत्वाकांक्षी गोबरधन योजना पर लटक रही तलवार 

मनोज कुमार (जहानाबाद)

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हुलासगंज प्रखंड के सुरजपुर पंचायत स्थित भवानीपुर गांव में सरकार की महत्वाकांक्षी गोबरधन योजना की स्थापना तो कर दी गई है, लेकिन इसके लिए आवश्यक अवयव गोबर की किल्लत ने योजना की सफलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

लगभग दो वर्ष पूर्व भवानीपुर गांव में इस परियोजना की स्थापना इस उद्देश्य से की गई थी कि न केवल भवानीपुर बल्कि आसपास के गांवों के पशुपालकों को भी गोबर के माध्यम से अतिरिक्त आय का स्रोत मिले। इससे ग्रामीणों को दूध के अलावा एक बेहतर आमदनी का विकल्प उपलब्ध कराने की परिकल्पना की गई थी।

करीब 50 लाख रुपये की लागत से बने इस प्रोजेक्ट में गोबर की नियमित आपूर्ति नहीं हो पाने के कारण योजना फिलहाल संकट के दौर से गुजर रही है। हालांकि अभी निर्माण की शेष प्रक्रिया जारी है और गांव के लगभग एक दर्जन घरों तक पाइपलाइन के माध्यम से कनेक्शन भी दिया जा चुका है।

ग्रामीण पशुपालकों का कहना है कि गोबर की 50 पैसे प्रति किलो तय की गई कीमत बेहद कम है। इतनी कम दर पर गोबर बेचने से बेहतर वे इसे खेतों में खाद के रूप में उपयोग करना ज्यादा उचित समझते हैं।

इस संबंध में लोहिया स्वच्छता मिशन की प्रखंड समन्वयक अनामिका कुमारी ने बताया कि गोबरधन योजना स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत एक महत्वपूर्ण पहल है। इसका उद्देश्य गांवों में गोबर व जैविक कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन कर स्वच्छता बढ़ाना, ऊर्जा का उत्पादन करना तथा ग्रामीण आय में वृद्धि करना है।

उन्होंने बताया कि यह योजना बायोगैस, जैविक उर्वरक एवं सीएनजी जैसे उत्पादों के माध्यम से धन सृजन पर केंद्रित है। इससे खुले में गोबर फेंकने की समस्या कम होती है और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलता है। साथ ही ग्रामीण परिवारों को स्वच्छ ईंधन उपलब्ध होने से उनके खर्च में भी कमी आती है।

वहीं गांव के कुछ लोगों का कहना है कि यह योजना वास्तव में एक ड्रीम प्रोजेक्ट है, लेकिन ग्रामीणों में इसके प्रति जागरूकता और समुचित जानकारी का अभाव है। यदि गोबर के उचित मूल्य और जागरूकता पर ध्यान दिया जाए तो यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दे सकती है।

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