*मनोज कुमार*जहानाबाद*
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पिछले तीन–चार दिनों से मौसम में आए अचानक बदलाव के कारण तापमान में तेजी से गिरावट दर्ज की गई है, जिसका सीधा असर दुधारू पशुओं और दूध उत्पादन पर पड़ने लगा है। कड़ाके की ठंड से जहां पशुओं की सेहत प्रभावित हो रही है, वहीं दूध उत्पादकों को उत्पादन बनाए रखने के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ रही है।
पशुपालकों का कहना है कि दुधारू पशु तापमान और मौसम के प्रति अत्यंत संवेदनशील होते हैं। तापमान में अत्यधिक गिरावट या वृद्धि, दोनों ही परिस्थितियों में दूध उत्पादन प्रभावित होता है। ठंड बढ़ने के साथ पशुओं में बीमारी की संभावना भी बढ़ जाती है।
जिले में कम्फेड के अंतर्गत संचालित दुग्ध समितियों में भी दूध संग्रहण में कमी देखी जाने लगी है। जहानाबाद शीतक केंद्र की प्रभारी **बबीता कुमारी** के अनुसार, संग्रहण में गिरावट का वास्तविक असर लगभग एक सप्ताह बाद स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। वहीं, समितियों के सचिवों ने बताया कि विशेष रूप से **संध्या पाली** में दूध संग्रहण में तेजी से कमी आई है।
इस संबंध में कम्फेड गया की पशु चिकित्सा पदाधिकारी **डॉ. अराधना** ने बताया कि ठंड के मौसम में पशु सामान्य से कम पानी पीते हैं, जिससे डिहाइड्रेशन की स्थिति बनती है और दूध बनने की प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है। धूप की कमी से विटामिन-डी का स्तर घटता है, पाचन प्रभावित होता है और हरे चारे की कमी से पोषण असंतुलित हो जाता है।
उन्होंने पशुपालकों को सलाह दी कि पशुओं को दिन में कम से कम दो बार **गुनगुना पानी** पिलाएं। संतुलित आहार में गेहूं चोकर (200–250 ग्राम), चना चोकर, मक्का, गुड़, मिनरल मिक्सचर और नमक अवश्य शामिल करें। पाचन सुधारने के लिए हल्दी, अजवाइन और गुड़ का मिश्रण दिया जा सकता है।
सर्दियों में पशुओं के रहने की जगह का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। पशुशाला में ठंडी हवा का सीधा प्रवेश न हो। इसके लिए फूस, टाट, बोरी या प्लास्टिक शीट का उपयोग किया जा सकता है। शरीर का तापमान बनाए रखने के लिए पशुओं को अतिरिक्त ऊर्जा की आवश्यकता होती है, इसलिए दाना, खली और चोकर की मात्रा सामान्य से थोड़ी अधिक रखें। सरसों की खली और गुड़ देने से शरीर में गर्मी बनी रहती है।
रोजाना 2 से 4 घंटे पशुओं को धूप में रखें, जिससे विटामिन-डी प्राप्त हो, हड्डियां मजबूत हों और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़े। सर्दी शुरू होने से पहले पशुओं का टीकाकरण और कृमिनाशक दवा देना भी अत्यंत आवश्यक है।
यदि किसी पशु में भूख कम लगना, दूध उत्पादन में अचानक गिरावट, सांस लेने में दिक्कत या बुखार जैसे लक्षण दिखाई दें, तो बिना देरी किए तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें। समय पर सही प्रबंधन और थोड़ी सावधानी से सर्दियों में पशुओं को सुरक्षित रखा जा सकता है और दूध उत्पादन को भी संतुलित बनाए रखा जा सकता है।











