November 5, 2026 3:47 am

अग्निवीर योजना में ऐतिहासिक बदलाव: अब 6 साल की होगी सेवा, सभी को मिलेगा स्थायी होने का मौका

नई दिल्ली:

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भारतीय सशस्त्र बलों की भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी अग्निपथ योजना में केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक और बड़ा संशोधन किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने अग्निवीरों के सेवा कार्यकाल को 2 वर्ष बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद अब अग्निवीर देश की सीमा पर 4 साल के बजाय कुल 6 वर्षों तक अपनी सेवाएं दे सकेंगे।

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने राष्ट्रीय मीडिया केंद्र में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस बड़े बदलाव की आधिकारिक घोषणा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि मूल योजना के तहत 25 प्रतिशत अग्निवीरों को योग्यता के आधार पर चार साल बाद सीधे स्थायी (रेगुलर) कैडर में शामिल करने का नियम पहले की तरह ही जारी रहेगा। हालांकि, बचे हुए 75 प्रतिशत जवान, जिन्हें पहले 4 साल बाद सेवानिवृत्त किया जाना था, उन्हें अब सरकार की तरफ से 2 साल का अतिरिक्त सेवा विस्तार (एक्सटेंशन) दिया जाएगा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस अतिरिक्त 2 वर्ष के कार्यकाल को ‘सेकंड टूर ऑफ ड्यूटी’ (Second Tour of Duty) का नाम दिया है।

6 साल बाद सभी इच्छुक जवानों को स्थायी भर्ती का रास्ता:

इस ऐतिहासिक नीतिगत बदलाव का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि 6 साल का कुल कार्यकाल पूरा करने के बाद, सभी इच्छुक और योग्य अग्निवीरों के लिए नियमित सैनिक (परमानेंट सोल्जर) बनने का रास्ता खुल जाएगा। यह भर्ती सशस्त्र बलों द्वारा तय किए गए कड़े शारीरिक मापदंडों, अनुशासन और प्रदर्शन के वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन (Objective Selection Criteria) पर आधारित होगी।

बढ़ा हुआ वेतन और आकर्षक सेवा निधि पैकेज:

सरकार ने स्पष्ट किया है कि पांचवें और छठे वर्ष के विस्तारित कार्यकाल के दौरान जवानों को न केवल बढ़ा हुआ वेतन (Remuneration) मिलेगा, बल्कि उनका ‘सेवा निधि पैकेज’ (Seva Nidhi Package) भी पहले से काफी बड़ा और आकर्षक होगा। हालांकि, ये जवान नियमित सैनिकों की तरह मिलने वाली पुरानी पेंशन और ग्रेच्युटी के दायरे से बाहर ही रहेंगे।

सेना के तीनों अंगों (थलसेना, नौसेना और वायुसेना) द्वारा पिछले चार वर्षों के दौरान किए गए निरंतर मूल्यांकन और सकारात्मक फीडबैक के आधार पर यह फैसला लिया गया है। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, इस कदम से तकनीकी और जटिल युद्ध प्रणालियों को संभालने के लिए सेना को अधिक अनुभवी और परिपक्व सैनिक मिलेंगे, वहीं देश सेवा का जज्बा रखने वाले युवाओं को भी लंबे समय तक रोजगार और भविष्य की बेहतर सुरक्षा मिल सकेगी

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